“भीमा कोरगांव की हिंसा का सत्य और दलित बंधुओं से सवाल” in Punjab Kesari

लंबे अर्से से जिसकी दबी जुबान चर्चा होती थी, देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के बारे में जो संदेह व्यक्त किए जा रहे थे, वो अब हकीकत में बदलते दिखाई दे रहे हैं। वैसे भी कहते हैं, बिना आग के धुआं नहीं होता। कहीं तो कुछ गड़बड़ थी, कहीं तो कुछ गलत हो रहा था जिसकी वजह से कांग्रेस संदेह के घेरे में आ रही थी। राहुल गांधी का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जाकर ‘आजादी ब्रिगेड’ को समर्थन देना, हैदराबाद विश्वविद्यालय जाकर माओवादी रोहित वेमुला की आत्महत्या पर राजनीति करना, गुजरात विधानसभा चुनावों में माओवादी पृष्ठभूमि वाले जिग्नेश मेवानी से उनकी नजदीकियां, फिर गुजरात और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में इस्लामिक आतंकी संगठन पाॅपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया और उसकी राजनीतिक इकाई सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी का खुलेआम इस्तेमाल….ऐसे और भी बहुत सारे संकेत बार बार मिल रहे थे जो बता रहे थे कि कांग्रेस की सरपरस्ती में नक्सलियों और इस्लामिक आतंकियों का एक गठबंधन बन रहा है जो मोदी सरकार के खिलाफ मुसलमानों के साथ दलितोें का इस्तेमाल भी करना चाहता है।

इसके बाद जब चर्च ने खुले आम मोदी सरकार पर आक्षेप लगाने शुरू कर दिए तो बात साफ हो गई कि कांग्रेस के इस गठबंधन में माओवादियों, इस्लामिक आतंकियोें के साथ चर्च का भी हिस्सा है। वैसे भी चर्च लगभग हर विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के विरोध और कांग्रेस के समर्थन में फतवा जारी करता रहा है।

ताजा घटनाक्रम ने तो सिर्फ उस संदेह को हकीकत का जामा ही पहनाया है जिसे हम लंबे अर्से से जान और समझ रहे थे। राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में इतने डेस्परेट हो जाएंगे कि नक्सलियों और इस्लामिक आतंकवादियों की गोद में बैठ जाएंगे, कांग्रेस के इतिहास और स्वयं राहुल गांधी के बयानों को देखते हुए ये अकल्पनीय तो नहीं लगता था, लेकिन देश के प्रधानमंत्री पद का दावेदार, सत्ता के लिए देश के दुश्मनों से समझौता कर लेगा और देश में हिंसा और अराजकता फैलाने का समर्थक बन जाएगा, ऐसा सोचने में थोड़ा अटपटा जरूर लगता है। सोच कर देखिए कल अगर ये व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बन जाता है तो ये किसका भला करेगा?

असल में हम बात कर रहे हैं भीमा कोरेगांव में हुए दंगों के बाद पुलिस जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों की। इस विषय में आगे बात करने से पहले एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि इस घटना की। 31 दिसंबर 2017 को पूना से 40 किलोमीटर दूर भीमा कोरेगांव में दलित इसी नाम के युद्ध की 200वीं सालगिरह मनाने के लिए एकत्र हुए। दलित इसे अपनी अस्मिता से जोड़ कर देखते हैं क्योंकि इसमें मूलतः दलित सैनिकों वाली ब्रिटिश सेना ने पेशवाओं की सेना को हराया था। इस बार के विशेष समारोह में माओवादी जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद ने भड़काऊ भाषण दिए जिसके बाद दंगे फैल गए। दलित पिछले दौ सौ साल से ये सालगिरह मनाते आ रहे हैं, लेकिन आज तक दंगे नहीं हुए। लेकिन इस बार समारोह के बाद दंगे भड़के जिनमें एक व्यक्ति मारा गया।

आखिर अबकी बार दंगे क्यों हुए? संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद को किसने और क्यों बुलाया? महाराष्ट्र पुलिस ने जब इसकी जांच आरंभ की तो षडयंत्र के पन्ने खुलने लगे। पता लगा माओवादी (कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया, माओवादी के सदस्य) दो महीने से इस कार्यक्रम की तैयारी कर रहे थे और हिंसा सुनियोजित थी। माओवादी दलित अस्मिता के प्रतीक इस अवसर का इस्तेमाल उन्हें भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खिलाफ भड़काने और अंततः मोदी सरकार को लांछित करने के लिए करना चाहते थे। उनके इस षडयंत्र में कांग्रेस और बाबा साहेब भीमराव राम अंबेदकर का पोता प्रकाश अंबेदकर भी शामिल थे।

महाराष्ट्र पुलिस की एंटी टेरर स्क्वाड ने इस सिलसिले में अलगर परिषद के पांच शहरी माओवादियों को गिरफ्तार किया। ये हैं – दिल्ली के रोना विल्सन, वकील सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन, नागपुर का महेश राउत और मुबई का सुधीर धवले। महाराष्ट्र पुलिस के अनुसार इन्हें गहरी जांच-पड़ताल और अकाट्य सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया गया।

छह जून को एक अंग्रेजी न्यूज चैनल ने खबर चलाई कि महाराष्ट्र पुलिस ने अपनी जांच के दौरान अन्य सबूतों के साथ ही एक विस्फोटक पत्र भी बरामद किया। सात जून को पुलिस ने अपने संवाददाता सम्मेलन में पुष्टि की कि जांच के दौरान उन्हें ये पत्र रोना विल्सन से मिला। पत्र किसी कामरेड एम ने रोना विल्सन को लिखा था। एक जनवरी की हिंसा के ठीक एक दिन बाद यानी दो जनवरी को लिखा गया पत्र असल में प्रशंसा पत्र है जो माओवादियों की रणनीतियों, उनके सहयोगियों आदि पर भी प्रकाश डालता है और सनसनीखेज खुलासे करता है। इसमें माओवादियों और कांग्रेस के रिश्तों, कांग्रेस द्वार उन्हें विरोध भड़काने के लिए पैसा और न्यायिक सहायता आदि देने के बारे में विस्फोटक जानकारी है। इसके मुताबिक सीपीआईएम के वरिष्ठ नेतृत्व ने कांग्रेस में अपने मित्रों से पहले ही बात कर ली थी जिन्होंने सुझाव दिया था कि वो दलितों के आंदोलन को और आक्रामक बनाएं और वो इस विषय में हर प्रकार की वित्तीय और न्यायिक सहायता उपलब्ध करवाएंगे और दुर्दांत माओवादियों कोबाड गंाधी और र्साइंबाबा को रिहा करवाने में भी मदद करेंगे। कांग्रेस सारी सहायता कामरेड जिग्नेश मेवानी की मार्फत देगी।

पत्र में कहा गया है कि माओवादियों के एजेंडा को भरीपा बहुजन महासंघ के नेता और बाबा साहब भीम राव अंबेदकर के पोते प्रकाश अंबेडकर का समर्थन हासिल है। दलितों की भावनाएं भाजपा और संघ के ब्राह्मण केंद्रित एजेंडा के खिलाफ हैं और इनका इस्तेमाल उन्हें बड़े पैमाने पर आंदोलित करने और देश में अराजकता फैलाने के लिए होना चाहिए। महाराष्ट्र सरकार पहली बार दबाव में है और अनेक राज्यों में लगातार आंदोलन कर इस दबाव को कायम रखना चाहिए। ये 2019 में मोदी के विजयरथ को रोकने में भी सहायक होगा।

पत्र कहता है कि कामरेड जिग्नेश और कामरेड उमर खालिद क्रांति के युवा लड़ाके हैं। हम देख सकते हैं कि प्रकाश अंबेदकर के सहयोग से देश भर में दलित संघर्षों को साथ लाने के उनके प्रयासों का अगले कुछ वर्षों में क्या परिणाम होगा। भीमा कोरेगांव प्रदर्शन बहुत प्रभावी रहा। एक युवा की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु का इस्तेमाल भविष्य के विरोध प्रदर्शनों और प्रचार सामग्री में होना चाहिए। दुनिया में फैले कामरेडों को भीमा कोरेगांव और दलितों से जुड़ी घटनाओं का दुनिया भर में ज्यादा से ज्यादा प्रचार करना चाहिए। आश्चर्य नहीं कि रोना विल्सन के कम्प्युटर से मिले एक अन्य पत्र पता लगा कि नक्सली प्रधानमंत्री मोदी की हत्या का षडयंत्र भी बना रहे थे।

पत्र को पढ़ कर माओवादियों और कांग्रेस की रणनीति के बारे में कोई शक बाकी नहीं रहता – पहले बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काओ, अराजकता फैलाओ और फिर दुनिया भर में इसका इस्तेमाल सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए करो। जाहिर है इन्हें असल में दलितों की चिंता नहीं है, ये तो सत्ता हासिल करने के लिए दलितों का इस्तेमाल करना चाहते हैं। लाशों पर राजनीति करने से इन्हें कोई गुरेज नहीं है। इन्हें देश की छवि और स्वाभिमान से भी कोई लेना-देना नहीं है। इनकी इस नीति के उदाहरण देश में जगह-जगह देखने को मिल रहे हैं। चाहे मंदसौर कांड हो या हरियाणा में जाटों का हिंसक प्रदर्शन, हर हिंसक घटना के पीछे कहीं न कहीं कांग्रेस या उसके समर्थकांे का हाथ सामने आ रहा है।

कांग्रेस और प्रतिबंधित माओवादियों के गठबंधन के इतने सबूत सामने आने के बाद अब दलितों को भी अपने समाज में पैठ बना चुके शहरी माओवादियों से सावधान हो जाना चाहिए। उन्हें सोचना चाहिए कि क्या वो अपने नाम का इस्तेमाल देश में अराजकता और हिंसा फैलाने के लिए होने देना चाहते हैं? पिछले वर्ष पश्चिम उत्तर प्रदेश में अचानक एक संगठन भीम आर्मी नाम से खड़ा किया गया जिसे समर्थन देने तुरंत जिग्नेश मेवानी भी पहुंच गया। इसने दलित अधिकारों की लड़ाई के नाम पर काफी उत्पात मचाया फिर जिग्नेश ने इसके समर्थन में जंतर-मंतर पर रैली भी की जो अंततः फ्लाॅप साबित हुई।

आॅपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर पंजाब में भी इस बार अजब नजारा देखने को मिला। दलित रविदासिया-आदि-धर्मी समुदाय के सबसे बड़े तीर्थस्थल शिरोमणि श्री गुरू रविदास मंदिर, चक हाकिम, फगवाड़ा में इस समुदाय ने मुसलमानों के साथ आॅपरेशन ब्लू स्टार की बरसी मनाई और जरनैल सिंह भिंडरांवाले का गुणगान किया। सदियों से हिंदुओं के एक अंग के रूप में रहने वाले इस समुदाय के कुछ लोगों का 13 अप्रैल को कुछ अन्य हिंदुओं से झगड़ा हो गया। अब दुर्भाग्यवश इन्हें हिंदू दुश्मन नजर आने लगे हैं और भारत विरोधी तत्व मित्र।

इसमें कोई शक नहीं कि सदियों से दलितों का शोषण हुआ है और आजादी के 70 साल बाद भी उनकी हालत जितनी सुधरनी चाहिए थी उतनी नहीं सुधरी है। लेकिन दलितों को ये भी याद रखना होगा कि आजादी के बाद अधिकांश समय कांग्रेस सत्ता में रही जिसने उन्हें वोट बैंक के तौर पर और उनके नेताओं को प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल तो किया पर उनकी हालत सुधारने पर ध्यान नहीं दिया। यही कांग्रेस फिर से सत्ता हासिल करने के लिए नक्सलियों और इस्लामिक आतंकियों के साथ मिलकर उन्हें हिंसा की आग में झोंकना चाहती है। हो सकता है इससे कांग्रेस को सत्ता मिल जाए पर क्या इससे दलितों का विकास होगा? जिस देश में वो रह रहे हैं, उसे राष्ट्रविरोधियों के हाथ में सौंप कर किसका भला होगा?

आखिर में दलितों से एक सवाल – आप संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर के बताए रास्ते पर चलना चाहते हो या कामरेड जिग्नेश मेवानी और कामरेड प्रकाश अंबेदकर के रास्ते पर? बाबा साहब कहते थे दलितों के उत्थान का रास्ता ज्ञानार्जन और आर्थिक विकास से निकलता है लेकिन जिग्नेश और प्रकाश का रास्ता हिंसा, अराजकता और नफरत का है। अब विकल्प आप को चुनना है।

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