Entries by Lalita NIjhawan

“प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ उत्तर भारतीयों को भड़काने की साजिश” in Punjab Kesari

गुजरात में कास्टिस्ट इस्लामिक कम्युनल कांग्रेस का वीभत्स दंगाई चेहरा एक बार फिर उजागर हुआ है। लेकिन इस बार कांग्रेस ने सांप्रदायिक दंगे नहीं करवाए, उसने गुजरात में 14 माह की मासूम बच्ची के घृणित बलात्कार का बहाना बना उससे भी घृणित काम किया – वहां दूसरे राज्यों, विशेष कर उत्तर प्रदेश और बिहार 1⁄4ध्यान रहे […]

“संघ को बदनाम करने की नापाक कोशिश” in Punjab Kesari

गांधी जयंती पर कोलकाता के दमदम नगर बाजार में बम विस्फोट हुआ जिसमें आठ साल का बच्चा मारा गया। अभी पुलिस ने केस दर्ज कर तफ्तीश शुरू भी नहीं की थी कि ममता बनर्जी सरकार के मंत्री पूर्णेंदू बोस ने इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जिम्मेदार ठहरा दिया। हालांकि संघ के स्थानीय नेतृत्व से […]

“ऐतिहासिक है संघ प्रमुख मोहन भागवत का विज्ञान भवन व्याख्यान” in Punjab Kesari

भ्रष्टाचार के कीचड़ में अच्छी तरह नहाए-धोए, लिपटे, सने, डूबे फर्जी गांधी परिवार के पूत राहुल (सपूत या कपूत ये आप तय करिए) पूछ रहे हैं कि देश को संगठित करने वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कौन होता है, देश को संगठित होना होगा तो वो खुद हो जाएगा। राहुल जैसा आदमी, जिसकी पूरी चुनाव नीति […]

‘Urban Naxals is not just a phrase, it’s a real threat to India’ in The Sunday Guardian

Entrepreneur Lalita Nijhawan exposes the Maoist modus operandi in urban areas to garner ideological support from intellectuals and academicians.   Lalita Nijhawan, a multifaceted woman entrepreneur, has been extensively supporting the academic debates on the issue of “Urban Naxalism”. She leads a travel conglomerate and owns Nijhawan Group of Companies which has diverse business modules […]

“RSS के सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान का मुकाबला नहीं कर सकतीं सीआईसी पार्टियां” on First post

दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत की व्याख्यान माला पर कास्टिस्ट इस्लामिक कम्युनल (सीआईसी) पार्टियों ने काफी विवाद खड़ा किया. लेकिन उनकी निंदा से परे दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने सिद्धांतों पर कायम है और देश के सर्वांगीण विकास के लक्ष्य की ओर […]

“हिंदू विरोधी वोट बैंक और संघ का अंधा विरोध” in Punjab Kesari

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ‘भविष्य का भारत’ विषय पर तीन दिवसीय चर्चा का आयोजन कर रहा है। इसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत स्वयं इस बारे में अपने विचार प्रस्तुत कर रहे हैं। संघ ने इसमें हर क्षेत्र और वर्ग के लोगों को न्यौता दिया। बुलावे पर अनेक कास्टिस्ट इस्लामिक कम्युनल (सीआईसी) पार्टियों का रवैया खेदजनक रहा। […]

“Continuous Evaluation System: Boon or Bane?” in TOI blog

Education is the cornerstone of a country’s growth, however it is receiving the attention of a much confused paper setters. Fluctuation in examination pattern is a cause of worry for our country. Students have become guinea pigs in Central Board of Secondary Education (CBSE) test and trial method. The Continuous Evaluation (CCE) system has been […]

“मां पर जान न्यौछावर करने वाला ही समझ सकता है संघ का राष्ट्रवाद” in Punjab Kesari

कुछ दिन पूर्व कनाडा से लौट रही एक ईसाई रिसर्चर (शोधछात्रा) सोफिया ने जब विमान में तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष तमिलिसई सौंदराजन को देखा तो भाजपा और मोदी सरकार को ‘फासिस्ट’ बताते हुए उनके खिलाफ नारे लगाने लगी। स्पष्ट था कि रिसर्चर होते हुए भी उसका दिमाग धार्मिक और राजनीतिक पूर्वाग्रहों से भरा था। […]

“नक्सलवादः आग से खेल रहे हैं राहुल गांधी” in Punjab Kesari

प्रख्यात पत्रकार स्वर्गीय कुलदीप नयर ने अपनी जीवनी ‘बियोंड द लाइंस’ में विस्तार से बताया है कि कैसे कांग्रेसी नेताओं ने पंजाब में अकाली दल – जनता दल सरकार को अस्थिर करने के लिए जनरैल सिंह भिंडरावाले को बढ़ावा दिया। वो लिखते हैंः “राजनीतिक सरजमीं पर भिंडरावाले का उदय 1977 में हुआ जब अकाली दल […]

Urban Naxals: The Enemy within

Murders Demolition of school buildings Tribal women raped Civilians kidnapped Central Reserve Police Force (CRPF) persons killed Ransoms demanded and yet Naxals are called revolutionaries and not terrorists. The complexity of their existence lies in the dual roles they play, one covert as tribal sympathisers and revolutionaries and another overt as extortionists, terrorists, blood hungry […]

Urban Naxals: The blood thirsty chameleons

Is Naxalism just an ideology? Is it followed by the tribals? Does it have followers in the cities? The poor have no ideology. They follow an ideologist, one who paints them a rosier picture. This ideology was efficiently transcribed by Charu Majumder, who wanted to alleviate poor tribals from the affliction of poverty. What started […]