दिल दुखता है

जब आतंकी की गोली से सैनिक शहीद हो जाता है
और जेएनयू कश्मीर की आजादी के नारे लगाता है
दिल दुखता है

जब सियाचीन के ग्लेशियर पर सैनिक चिरनिद्रा में सो जाता है
और आतंकी की बरसी पर “बुद्धिजीवी“ कैंडल मार्च सजाता है
दिल दुखता है

जब शहीद सैनिक के बच्चे गुरबत में फाके करते हैं
और जिहादियों की सुरक्षा में करोड़ों रूपया फुंक जाता है
दिल दुखता है

जब जिहादी उदारवादी, और गद्दार अभिव्यक्ति का रक्षक बन जाता है
जब गुरमेहर हिरोइन बन जाती है, और उमर नायक बन जाता है
दिल दुखता है

जब देशप्रेम गाली बन जाती है, जब राष्ट्रवाद का मजाक उड़ाया जाता है
जब वोट की राजनीति की खातिर अलगावाद को गले लगाया जाता है
दिल दुखता है

– ललिता निझावन