“जनरल बाजवा को खुला पत्र भारत से दोस्ती बदल सकती है पाकिस्तान की तस्वीर, फैसला आपके हाथ में” in Punjab Kesari

जनरल कमर जावेद बाजवा
ये पत्र मैं सिर्फ भारत की ही नहीं, पाकिस्तान की जनता की ओर से भी लिख रही हूं। मैं इसे आपके प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी को भी लिख सकती थी, लेकिन इसे आपको ही लिखना उचित समझा क्योंकि असली सत्ता तो आपके पास ही है। आप ही अपने देश की रक्षा और विदेश नीति तय करते हैं। आप ही तय करते हैं कि भारत, अफगानिस्तान आदि पड़ोसी देशों के साथ पाकिस्तान के संबंध कैसे हों।

हर साल संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा में आपका प्रधानमंत्री जो भाषण पढ़ता है, उसकी एक-एक पंक्ति आप ही तय करते हैं। संयुक्त राष्ट्र से याद आया, इस वर्ष वहां पाकिस्तान की जो फजीहत हुई, उससे तो आप अवगत ही होंगे। भारत ने तो आपके देश को आतंकिस्तान बताया ही, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान ने भी आपके आतंकी इरादों का पर्दाफाश किया। आपके हर दिल अजीज, सदाबहार दोस्त चीन ने भी कश्मीर पर आपकी नीतियों को गलत ठहरा दिया, जबकि आप कश्मीर का एक हिस्सा उसे भेंट में दे चुके है जहां अब वो आर्थिक गलियारा (चाइना-पाकिस्तान इकाॅनाॅमिक काॅरीडोर) बना रहा है।

अब आप गुस्से में संयुक्त राष्ट्र में भारत को ही आतंकवादी साबित करने की जुगत में लग गए हो। इससे पहले आप अपनी गरीब जनता का पैसा ऐसी बेसिरपैर की हरकतों पर खर्च करो, हम आपको कुछ दिन पहले हुए ब्रिक्स सम्मेलन की याद दिला दें। आपके परम मित्र चीन की सरजमीं पर हुए इस सम्मेलन में भी आपकी अच्छी खासी ले दे हुई। इसके घोषणापत्र में आपके प्रिय ‘स्ट्रैटेजिक असेट्स’ (आतंकी तंजीमों लश्कर ए तौएबा, जैश ए मौहम्मद, हक्कानी नेटवर्क आदि) की कड़ी भत्र्सना की गई। आपको याद ही होगा कि अपनी नई अफगानिस्तान-पाकिस्तान नीति की घोषणा के समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैसे आपके देश को आतंकवादियों का स्वर्ग बताया और आपको साफ-साफ नमकहराम कहा।

अब आप कहेंगे कि ये सब तो दुनिया जानती है, इसके लिए चिट्ठी लिखने की क्या जरूरत है। तो जनाब, ये खत लिखने का मकसद आपको यही याद दिलाना है कि जो बात दुनिया जानती है, वो आपके संज्ञान में भी लाई जाए। आपकी आंख में उंगली डाल कर आपको याद दिलाया जाए कि दुनिया आपके बारे में क्या सोचती है और क्यों सोचती है और सबसे बड़ी बात कि इसका आपके देश की और भारत की जनता पर क्या असर पड़ रहा है।

आप जिस कश्मीर के ‘हक की लड़ाई’ लड़ रहे हैं, कभी आपने सोचा है कि इसका कश्मीरियों पर क्या असर पड़ा है? आपने कश्मीर में हुर्रियत के दलालों (आपकी निगाह में ‘स्ट्रैटेजिक असेट’) को पाला जो आपके यहां से भेजे गए आतंकियों की सरपरस्ती करते हैं और आपके निर्देशों के अनुसार राज्य में आतंकवादी गतिविधियां चलाते हैं। आप पाकिस्तान में बैठ कर हुर्रियत के इन आतंकवादियों की वेबसाइटें चलाते हो और पत्थरबाजी के टाइमटेबल तय करते हो और ये यहां बैठ कर उसका क्रियान्वयन करते हैं। जब भारतीय सुरक्षाबल आपके आतंकवादियों को काबू में करने की कोशिश करते हैं, तो आप दुनिया भर में मानवाधिकार उल्लंघन का रोना रोते हो। आपने पूरा षडयंत्र रच रखा है जिसमें बिला शक अनेक भारतीय नेता, पत्रकार, गैरसरकारी संगठन आदि शामिल हैं। भारत में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर इस्लामिक कट्टरवादियों को बढ़ावा देने वाले राजनीतिक दल भी जाने अनजाने में आपके षडयंत्र में शामिल रहे हैं।

पाकिस्तान के इशारे पर हुर्रियत के दलालों और उनके सशस्त्र आतंकवादियों ने करीब चार लाख कश्मीरी पंडितों को पलायन के लिए मजबूर कर दिया। आपने सोचा कि हिंदुओं को कश्मीर से बाहर करने के बाद उस पर कब्जा जमाना आसान होगा, पर आपने कभी ये क्यों नहीं सोचा कि जिस कश्मीर के लिए भारत आपको चार युद्धों में धूल चटा चुका है, वो उसे आपको थाली में परोस कर नहीं दे देगा। भारत के इस्लाम परस्त राजनीतिक दल भले ही पंडितों के पलायन को मूक समर्थन देते रहे, पर भारतीय सेना कभी देश की एक भी इंच जमीन आपको छीन लेने देगी, ऐसा कभी होगा नहीं। आपको याद दिला दें, यूपीए सरकार ने आपका दिल जीतने के लिए सियाचीन से सेना हटाने की कोशिश की थी, लेकिन तत्कालीन सेना प्रमुख जे जे सिंह ने इससे साफ इनकार कर दिया था।

बहरहाल आज कश्मीर में आपके मुसलमान आतंकवादी, कश्मीरी मुसलमानों को ही मार रहे हैं। अब ये साफ हो चुका है कि आप जिन कश्मीरियों के नाम पर प्राॅक्सी वाॅर लड़ रहे हो, आपको उनकी कोई चिंता नहीं। आप तो सिर्फ धर्म के नाम पर उनकी जमीन चाहते हो। अगर कश्मीर में आपके आतंकवादियों को छोड़ दें, तो बाकी कश्मीरी मुसलमान समझ चुके हैं कि आपका इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है। आपका दिल इस्लाम के लिए धड़कता और टू नेशन थ्योरी में दम होता तो बांग्लादेश अलग नहीं हुआ होता, आप अफगानिस्तान के मुसलमानों पर यूं जुल्म न ढा रहे होते। अगर आप सच्चे मुसलमान होते तो आप अपने एक अन्य पड़ोसी इस्लामिक देश ईरान के साथ दोस्ती निभा रहे होते न कि दुश्मनी।

आपके एक पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने कहा था कि पाकिस्तान को घास खानी पड़े तब भी वो परमाणु बम बनाएगा। भारत पर हजार जख्म करने की नीति बनाने वाले इस शख्स को आपके ही एक अन्य सैनिक तानाशाह जनरल जिया उल हक ने फांसी के तख्ते पर चढ़ा दिया था। खैर, वो कहानी फिर कभी। आज आपके देश के हालात भुट्टो से अलग नहीं है। भारत के साथ दुश्मनी के चक्कर में आपकी अर्थव्यवस्था बैठ चुकी है। आपके पास दो महीने के आयात के लिए भी विदेशी मुद्रा नहीं है। आप दुनिया भर से मंहगे कर्जे ले रहे हो। उत्तरी कोरिया की तर्ज पर अमेरिका को आंखें दिखा रहे हो पर ये नहीं सोच पा रहे कि अगर वो अपनी पर आ गया तो वल्र्ड बैंक और माॅनिटरी फंड से आपको कर्ज मिलना भी बंद हो जाएगा। आपकी सेना के बड़े अफसरों और नेताओं के विदेशों में बैंक खाते हैं, अकूत संपत्तियां हैं। इसलिए जब संकट आएगा तो वो तो बाहर भाग जाएंगे, असली मार तो आम जनता को ही पड़ेगी, जो पहले से ही कर्ज और कट्टरवाद के बोझ तले दबी पड़ी है।

आपने विदेशों से तकनीकें चुरा कर चीनी मदद से बम तो बना लिया, पर इससे आपको क्या हासिल हुआ? आज आपके बम के बावजूद क्या कोई आपसे डर रहा है? नहीं, बिल्कुल नहीं। कुछ समय पहले भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की और ये साफ कर दिया कि वो जरूरत पड़ने पर पाक अधिकृत कश्मीर में घुस सकता है। वैसे भी भारत इसे कानूनन अपना हिस्सा मानता है। अभी बहुत दिन नहीं बीते जब अफगान सेना ने आपके सैनिकों को मार गिराया और ईरानी सेना प्रमुख ने धमकी दी कि अगर पानी सर से ऊपर गया तो वो भी पाकिस्तान में घुस कर आतंकवादियों को मारेंगे। डोनाल्ड ट्रंप की हालिया धमकी के बाद आपके नवनियुक्त विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चीन, तुर्की और ईरान का दौरा किया और रूस आने की इजाजत मांगी। चीन और तुर्की ने तो थोड़ी नसीहत दी पर ईरान ने तो आपके जख्मों पर मलहम लगाने तक से साफ इनकार कर दिया। आप रूस और चीन के साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ नया गुट बनाना चाहते थे, लेकिन रूसी विदेश मंत्री ने तो मिलने से ही मना कर दिया। ऊपर से अक्तूबर में भारत के साथ युद्धाभ्यास की घोषणा भी कर दी।

आपको समझ में नहीं आ रहा कि आज दुनिया की निगाह में आपकी औकात एक ‘फेल्ड स्टेट’ की है। चीन जैसे देश अपने सामरिक हितों के लिए आपका इस्तेमाल तो करना चाहते हैं पर भारत के खिलाफ आपकी लड़ाई नहीं लड़ना चाहते। दक्षिण चीन को अरब सागर से जोड़ने के लिए चीन भले ही आपके देश में 46 अरब डाॅलर का आर्थिक गलियारा बना रहा है, लेकिन उसका भारत के साथ 75 अरब डाॅलर का व्यापार भी है। आपको याद होगा कि डोकलाम विवाद के समय कैसे आपके बिकाऊ मीडिया ने चीन को भारत के खिलाफ भड़काने की भरपूर कोशिश की, लेकिन चीन ने पूरी परिपक्वता दिखाते हुए, ये विवाद हल किया।

आज कुल जमा हालात ये हैं कि बम आपकी रक्षा नहीं कर रहा, आपको बम की रक्षा करनी पड़ रही है। आपके परमाणु बम से न तो पड़ोसी मुल्क डर रहे हैं और न हीे महाशक्तियां इसके दबाव में आकर आपसे कोई समझौता करने के लिए तैयार हैं। अब तो दुनिया को डर है कि कहीं ये बम आपके पाले पोसे ‘स्ट्रैटेजिक असेट्स’ के हाथों में न पड़ जाएं।

बम के बावजूद आपकी अर्थव्यवस्था बैठ चुकी है, सारे पड़ोसी आपके दुश्मन बने हुए हैं, पंजाब को छोड़ आपके देश का हर सूबा पाकिस्तान से अलग होने की जिद पकड़ कर बैठा है। पर आपके कान पर जूं नहीं रेंग रही है। पाकिस्तानी मीडिया में आपके चमचे दिन रात भ्रष्ट नेताओं को गाली देते हैं, पर वो जनता को ये नहीं बताते कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और गरीबी के लिए सबसे ज्यादा सेना जिम्मेदार है जो भारत से दुश्मनी के नाम पर देश का एक चैथाई बजट हड़प कर जाती है। ये सेना ही है जिसने सउदी अरब के साथ मिलकर देश को इस्लामिक कट्टरवाद और आतंकवाद की आग में झौंका और ये सेना ही है जो आज लश्कर ए तौएबा जैसी आतंकवादी तंजीमों को चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर रही है।

आप भले ही सोच रहे हों कि आप कश्मीर के बारे में अपने फर्जी नेरेटिव (कश्मीर में सात लाख सैनिक है, सेना औरतों का बलात्कार कर रही है, बच्चों को मार रही है, मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है, संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत जनमत संग्रह होना चाहिए आदि आदि) और अफगानिस्तान के बारे में अपनी दोगली नीति को दुनिया के गले उतार पाएंगे, लेकिन ऐसा होगा नहीं।

जरा सोचिए, कट्टरवादियों और आतंकियों की शिकार पाकिस्तान की गरीब और बेसहारा जनता कब तक ‘भारत के साथ दुश्मनी’ और ‘अफगानिस्तान में स्ट्रैटेजिक डेप्थ’ के आपके फर्जी मिथकों को ढोएगी? कब तब सेना देशभक्ति के नाम पर लोगों का खून चूसती रहेगी। हसन निसार, हामिद मीर, नजम सेठी, रउफ क्लासरा, आमिर मतीन जैसे लगभग सभी वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार आज ये कह रहे हैं कि सेना की नीतियों के कारण देश तबाह हो चुका है। अब अमेरिका, चीन, रूस के तलवे चाटने से बेहतर है कि भारत से दोस्ती कर ली जाए। भारत बड़ा और अमीर मुल्क है। भारत को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया जाए और उसके साथ व्यापार के रास्ते खोल कर अपनी गरीबी पर काबू पाया जाए। सेना की जिद के कारण पाकिस्तान, भारत को अफगानिस्तान के साथ व्यापार करने के लिए रास्ता भी नहीं दे रहा है। आपके देश में सही सोच रखने वाले लगभग सभी लोग अब मांग कर रहे हैं कि भारत को अफगानिस्तान के साथ व्यापार के लिए गलियार दिया जाए और इससे खुद भी फायदा उठाया जाए।

बाजवा साब, अब सिर्फ पाकिस्तानी ही नहीं, सारी दुनिया जानती है कि आपकी सेना ने दक्षिण अमेरिका के ड्रग माफियाओं से लेकर दुबई और म्यांमार होते हुए समूचे पूर्वी एशिया तक मादक मदार्थों की तस्करी का बड़ा जाल बिछाया हुआ है जिसमें दाउद इब्राहिम जैसे गुर्गे आपका साथ देते हैं। आप क्यों ये अवैध धंधे छोड़ कर वैध व्यापार को बढ़ावा नहीं देते जिससे आम जनता का जीवन स्तर भी सुधरे।

अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तानी सेना, अपने स्वार्थों को छोड़कर आम जनता के बारे में सोचे। अपने खर्चों में कटौती करे और सउदी अरब के पैसे से चलने वाले 32,000 से भी ज्यादा वहाबी मदरसों को बंद करवाकर, नई पीढ़ी के लिए वैज्ञानिक सोच वाली शिक्षा की व्यवस्था करे। सेना अपने काले धंधों को दरकिनार कर देश की अर्थव्यवस्था के बारे में सोचे। आतंकवादियों पर लगाम लगाने के नाम पर जर्ब ए अज्ब जैसे सैनिक अभियानों में अपने ही लोगों का कत्ल करने की जगह, पंजाब में सेना के संरक्षण में चली रही आतंकी फैक्ट्रियों को समाप्त करे।

आपके पूववर्ती जनरल अशफाक परवेज कयानी ने एक बार कहा था कि पाकिस्तान को भारत से खतरा नहीं है, उसे खतरा तो अंदरूनी दुश्मनों से है। वो जानते थे कि भारत की प्राथमिकता पाकिस्तान की तबाही नही बल्कि अपना विकास है। ये छोटी सी बात आपके भेजे में क्यां नहीं घुसती? आज आपसे पाकिस्तानी जनता आपसे पूछ रही है कि आप हमारे खैरख्वाह हो या दुश्मन? आप अपनी लगाई आग में हमें क्यों झुलसा रहे हो? ये सिलसिला कब तक चलेगा? कभी थमेगा भी कि नहीं? कब तक पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद के गढ़ और निर्यातक के रूप में बदनाम रहेगा? कब तक अमेरिका से म्यांमार और इंडोनेशिया तक हर आतंकी हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया जाता रहेगा? कब तक दुनिया में आम पाकिस्तानी को हेय समझा जाएगा और उसके पासपोर्ट को अछूत? आपने ‘इस्लामिक बम’ बना कर हमें जिस ‘इस्लामी उम्मा’ की लीडर बनाने के सपने दिखाए थे, आज वही ‘इस्लामी उम्मा’ हमें क्यों दुत्कार रही है? क्यों आज हमारी हालत धोबी के कुत्ते जैसे हो गई है, जो घर का है न घाट का?

बाजवा साब, पाकिस्तान आज एक बार फिर दोराहे पर खड़ा है। आप मौजूदा नीतियों को जारी रखते हुए तबाही के रास्ते पर जाना चाहते हैं, या अपनी जनता के लिए आर्थिक और सामाजिक समृद्धि की नई इबारत लिखना चाहते हैं, ये आप पर निर्भर है। हम दावे के साथ कह सकते हैं कि यदि आप अपनी नीतियों में वास्तव में सत्यनिष्ठा से परिवर्तन करेंगे, तो भारतीय नेतृत्व हीं नही, हम भारत के लोग भी आपका पूरा साथ देंगे। दक्षिण एशिया में शांति कश्मीर की कथित ‘समस्या’ के हल होने से नहीं, आपकी नीतियों में ईमानदार बदलाव से आएगी।

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