‘गरीबों के मसीहा हैं नरेंद्र मोदी’ in Punjab Kesari

अब तक जो चुनावी गठबंधन हुए हैं, जो आम आदमी की राय बन रही है, उससे एक बात स्पष्ट है कि देश में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है और वही मई में पुनः प्रधानमंत्री बनेंगे। अफवाहबाज कांग्रेस ने राफेल से लेकर रोजगार तक लगभग हर मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की और देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटने के षडयंत्र रचे, लेकिन यदि आमजन से बात करें तो पता लगता है कि कांग्रेस की अफवाहबाजी चाय के प्याले में तूफान से अधिक कुछ नहीं है जिसे कांग्रेसी मीडिया बढ़ावा देता है और कांग्रेसी कार्यकर्ता पब्लिक के गले उतारने की असफल कोशिश करता है।

कांग्रेस जब मोदी पर हमला करती है तो ये भूल जाती है कि उसने अपने प्रत्यक्ष-अप्रयक्ष साठ साल के शासनकाल में क्या नहीं किया। हकीकत तो ये है कि उसने सिर्फ मोटे-मोटे जुमले उछाले और जमीनी स्तर पर आम आदमी का जीवनस्तर सुधारने का कोई ठोस काम नहीं किया। एक बानगी देखिए – कांग्रेसी प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने देश में आर्थिक उदारीकरण की नई बयार शुरू की जिसे उनके शागिर्द रहे मनमोहन सिंह ने आगे बढ़ाया। लेकिन अगर हम इस पूरी प्रक्रिया को ध्यान से देखें तो पता लगेगा कि उनके अधूरे सुुधार और अंधा क्रोनी कैपिटल्जिम आम आदमी के लिए कितना घातक सिद्ध हुआ। एक तरफ तो मनमोहन सिंह के कार्यकाल में खरबों रूपए के घोटाले हुए तो दूसरी ओर आम आदमी के लिए हायर एंड फायर की नीति लागू हो गई। इसमें कर्मचारी को 11 महीने के कांट्रेक्ट और एक महीने के नोटिस पर रखा जाता है। बाॅस से जरा सी अनबन हुई नहीं कि कर्मचारी नौकरी से बाहर।

जाहिर है न तो नरसिम्हा राव ने, और न ही उनके चेले मनमोहन सिंह ने आमजन की सामाजिक सुरक्षा के लिए कोई काम किया। राहुल गांधी भले ही मोदी पर उद्योगपतियों से सांठगांठ करने की कितने ही झूठे आरोप लगाते रहे हों, लेकिन हकीकत यही है कि कांग्रेस ने विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे दसियों करीबी धूर्त व्यापारियों को पब्लिक सैक्टर बैंकों से खरबों रूपए के ऋण दिलवाए और उन्हें गबन करने की छूट दी। कभी आपने सोचा कि यदि 2014 में मोदी सरकार नहीं आई होती तो क्या सूरत होती? हम आपको बताते हैं – कांग्रेस के पुनः सरकार बनाने की स्थिति में इन मक्कार व्यापारियों को और कर्ज दिया जाता और फिर नेता, नौकरशाह, बैंकर इनके साथ मिलकर जनता के खरबों रूपए चुपचाप अपनी जेब के हवाले कर देते।

इसके विपरीत मोदी सरकार ने धूर्त व्यापारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ही नहीं की, ऐसे कानून भी बनाए जिससे ऐसे हालात दोबारा पैदा ही न हों। अगर हों भी तो इन मक्कार लोगों की सारी चल-अचल संपत्ति जब्त की जा सके। धूर्त व्यापारियों के साथ मिलकर जनता का पैसा लूटने की जगह मोदी सरकार ने सही मायने में ईमानदार आर्थिक सुधार किए और आमजन की सामाजिक सुरक्षा और न्याय को सबसे अधिक तवज्जो दी। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत गरीब लोगों के 28 करोड़ खाते खोले गए और उन्हें औपचारिक क्षेत्र की विŸाीय सेवाओं के दायरे में लाया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं के खाते भी खोले गए। यही नहीं, मोदी सरकार ने आमजन को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना जैसी अनेक योजनाएं शुरू कीं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि एक करोड़ से भी अधिक लोग सुनिश्चित आय देने वाली अटल पेंशन योजना का लाभ ले रहे हैं। मोदी सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सूची काफी लंबी है, लेकिन संक्षेप में कहें तो अब तक 50 करोड़ से भी अधिक लोग इनका लाभ उठा चुके हैं। यहां आयुष्मान योजना का उल्लेख आवश्यक है जिसके तहत गरीब परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रूपए का मेडिकल बीमा मिलता है। इस अकेली योजना का लाभ करीब 5 करोड़ परिवारों को मिला है।

विपक्षी मोदी सरकार को घेरने के लिए कुछ चुनींदा विषयों को बार बार उठाते हैं जैसे ‘किसानों की बदहाली’, ‘बेरोजगारी’ आदि। आपको बता दें कि इन दोनों क्षेत्रों को बेहतर बनाने के लिए जितना काम मोदी सरकार ने किया है, उतना पिछले 70 साल में किसी सरकार ने नहीं किया। भारत के इतिहास में पहली बार मोदी सरकार ने रूरल इम्पलाॅयमेंट गारंटी प्रोग्राम (मनरेगा) का सालाना बजट 60,000 करोड़ तक बढ़ाया है। इस कार्यक्रम के तहत ग्रामीण मजदूरों को प्रतिवर्ष कम से कम 100 दिन का रोजगार दिया जाता है। इसी प्रकार ग्रामीण सड़कों के विकास का बजट प्रतिवर्ष 19,000 करोड़ तक किया गया। पिछले 70 साल से देश के गांव अंधेरे में डूबे थे, लेकिन मोदी सरकार ने सौभाग्य योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत लगभग हर इच्छुक परिवार तक बिजली पहुंचा दी। पिछली जनगणना में देश में 5,97,464 ग्राम चिन्हित किए गए थे। बड़ी उपलब्धि ये है कि इन सभी गांवों तक बिजली पहुंचा दी गई है। ग्रामीण महिलाओं की रोजमर्रा की तकलीफें दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर शौचालय बनाए गए हैं। उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए उन्हें उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन दिए गए हैं। स्थानाभाव के कारण हम यहां कुछ ही योजनाओं का उल्लेख कर पा रहे हैं। कहना न होगा कि गांव वालों को ग्राम केंद्रित योजनाओं का लाभ तो मिलता ही है, साथ ही वो सामान्य योजनाओं से भी लाभान्वित होते हैं।

मोदी सरकार के खिलाफ जो सबसे बड़ा झूठ फैलाया जा रहा है वो ये कि सरकार रोजगार के मुद्दे पर पूरी तरह विफल रही है। इससे बड़ा झूठ कोई हो नहीं सकता। इम्पलाई प्राॅवीडेंट फंड आॅर्गनाइजेशन (ईपीएफओ) के ताजा आंकड़ांे के अनुसार सितंबर 2017 से जनवरी 2019 के बीच ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में 76.48 लाख लोग जुड़े। इसका सीधा अर्थ है कि संगठित क्षेत्र में इस 17 महीने की अवधि के दौरान इतनी ही नौकरियों का सृजन हुआ। अकेले जनवरी, 2019 में ही 8,96,516 लोग ईपीएफओ से जुड़े जो सितंबर से अब तक सर्वाधिक है।

रोजगार के संबंध में उद्योग संगठन काॅनफेडरेशन आॅफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआईआई) के आंकड़े बताते हैं कि मोदी सरकार के कार्यकाल में रोजगार क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ। आंकड़ों के मुताबिक माइक्रो, मीडियम एंड स्माॅल एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) क्षेत्र में रोजगार में प्रतिवर्ष 13.9 प्रतिशत प्रतिवर्ष की वृद्धि हुई। ये आंकड़ा एक सर्वेक्षण के बाद मिला जिसमें 1,05,347 एमएसएमई ईकाइयों ने भाग लिया। ये आंकड़ा विपक्ष के उस दावे की हवा निकाल देता है जो कहता है कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण इस क्षेत्र को व्यापक हानि हुई और रोजगार वृद्धि दर नकारात्मक हो गई। सरकार ने करीब 16 करोड़ लोगों को मुद्रा योजना के तहत स्वरोजगार के लिए ऋण दिए। अगर हम मान लें कि इसमें सिर्फ 50 फीसदी उद्यमी ही सफल हुए तब भी अगर प्रत्येक उद्यमी ने एक व्यक्ति को भी रोजगार दिया हो तो अकेले इसी तरह 16 करोड़ रोजगार का सृजन हुआ। इसके अतिरिक्त स्टार्ट अप इंडिया और अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिला उद्यमियों के लिए आरंभ की गई स्टैंड अप इंडिया योजनाओं के तहत भी लाखों रोजगार का सृजन हुआ है।

भारत का सकल घरेलू उत्पाद (ग्राॅस डोमेस्टिक प्राॅडक्ट, जीडीपी) 2013 में 1.857 ट्रिलियन डाॅलर था जो 2018 में 2.7 ट्रिलियन डाॅलर हो गया। आप अनुमार लगा सकते हैं कि ये वृद्धि आर्थिक गतिविधियों और रोजगार वृद्धि के बिना तो संभव नहीं ही हुई होगी। यूपीए सरकार ने मनरेगा के लिए 2013 में 24,000 करोड़ रूपए दिए थे जो 2019 में बढ़ कर 60,000 करोड़ रूपए हो गए। जाहिर है इसके तहत भी करोड़ों कृषि मजदूरों को रोजगार मिला ही होगा। विŸाीय वर्ष 2017-18 में व्यावसायिक वाहनों की बिक्री 20.6 प्रतिशत बढ़कर 8,56,000 युनिट तक पहुंच गई। यही ट्रंेड अगले विŸा वर्ष में भी जारी रहने का अनुमान है। आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि इन वाहनों के परिचालन में भी लाखों लोगों को रोजगार मिला ही होगा। अगर हम क्षेत्रवार आंकड़े बताने लगें तो काफी स्थान चाहिए होगा। संक्षेप मंे कहें तो ‘रोजगार की कमी’ का विपक्षी दुष्प्रचार अफवाह से अधिक कुछ नहीं है।

मोदी के सत्ता में आने के बाद ‘असहिष्णुता गैंग’ ने उसके बारे में मनगढ़ंत झूठ प्रचारित करने शुरू कर दिए। इनमें से सबसे बड़ा झूठ ये था कि सरकार ‘लोगों की आवाज दबा रही है’ और ‘अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में है’। आपने स्वयं देखा होगा कि पिछले पांच साल में विपक्षियों ने राफेल से रोजगार तक आए दिन कितनी ही अफवाहें उड़ाईं। कितने विपक्षी नेताओं ने तो मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा तक का प्रयोग किया। सरकार को अफवाहों पर लगाम लगाने का पूरा अधिकार है, फिर भी सरकार ने विपक्ष को झूठ प्रचारित करने से नहीं रोका अपितु लोकतांत्रिक तरीके से अपना पक्ष सामने रखा। दलितों को भड़काने वाले नक्सली संगठन लगातार ये अफवाह उड़ाते रहे कि मोदी सरकार संविधान बदल देगी। हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो ये तक कह मारा कि अगर मोदी फिर से सŸाा में आए तो तानाशाही आ जाएगी और भविष्य में चुनाव नहीं होंगे। इसके विपरीत सत्य यह है कि मोदी ने संसद में अपने पहले ही भाषण में कहा था कि संविधान मेरा धर्म है और मैं हर कीमत पर इसकी हिफाजत करूंगा। हमने पिछले पांच साल में देखा कि मोदी ने हर काम संविधान की मर्यादा में रह कर ही किया।

कुल मिलाकर हम ये दावा कर सकते हैं कि मोदी सरकार वास्तव में जनवादी, उदारवादी और समावेशी सरकार है जिसने अपना हर निर्णय गरीब आवाम और देशहित को ध्यान में रखते हुए लिया और उसकी बेहतरी और विकास के लिए ईमानदारी से कोशिश की। मोदी ने अपने नारे ‘सबका साथ, सबका विकास’ को वास्तव में जमीनी स्तर पर लागू किया। ये सही है कि पिछले 70 साल में कांग्रेसियों ने जो गंद फैलाया, वो महज पांच साल में साफ नहीं हो सकता। लेकिन ये भी हकीकत है कि मोदी ने विपक्ष की इस्लामिक सांप्रदायिक, देशविरोधी ओछी राजनीति के बावजूद पूरी तरह साफ-सुथरी विकासपरक सरकार चलाई और समाज के दलित-शोषित वर्ग को सर्वोच्च वरीयता दी।

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