गर्मी लगे तो पानी पिएं, साॅफ्ट ड्रिंक्स नहीं

गर्मी उफान पर है। बाहर कदम रखा नहीं कि प्यास लगने लगती है। ऐसे में अनेक लोग कोल्ड ड्रिंक्स पीना पसंद करते हैं। सेहत के प्रति सजग कुछ लोग डाईट ड्रिंक्स लेते हैं। खेल-कूद में दिलचस्पी रखने वाले व्यक्ति एनर्जी ड्रिंक्स की शरण लेते हैंैं। सवाल ये है कि क्या इनका सेवन उचित है? क्या ये सेहत के लिए फायदेमंद हैं?

सबसे पहले हम बात करते हैं डाइट ड्रिंक्स की। लोग सोचते हैं कि इनमें कोई चीनी नहीं होती, इसलिए इन्हें लेने से सेहत पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। जबकि असल में ऐसा है नहीं।
हाल ही में अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी ने डाइट ड्रिंक्स लेने वाले 4,372 व्यस्क लोगों पर अध्ययन किया। इसमें अनेक चैंकाने वाली बातें सामने आईं। सबसे महत्वपूर्ण बात ये थी कि अत्यधिक चीनी वाले दूसरे ड्रिंक्स के मुकाबले ऐसे पेय पदार्थों से दिल का दौरा और डिमनेशिया होने की आशंका कहीं अधिक होती है। असल में अगर कोई व्यस्क ऐसे पेय का दिन में सिर्फ एक ही कैन पीता है, तब भी उसे तीन गुना अधिक जोखिम होता है।
इसका सबसे बड़ा कारण हैं कृत्रिम स्वीटनर एसपरटेम और सैकरीन जिनका इस्तेमाल इन्हें मीठा बनाने में किया जाता है। ये रक्तवाहिनियों को संकुचित कर देते हैं जिससे दिल के दौरे और डिमनेशिया का खतरा बढ़ जाता है।
जिन 4,372 लोगों पर अध्ययन किया गया वो सभी 45 वर्ष या उस से अधिक उम्र के थे और उनके खाने पीने की मात्रा का 10 वर्ष तक अध्ययन किया गया। इसके बाद पता लगा कि ऐसा कोई डिंªक्स न लेने वाले लोगों के मुकाबले में, ऐसे लोगों को जो एक दिन में एक या अधिक ऐसे डिंªक्स लेते थे, दिल का दौरा पड़ने की आशंका तीन गुना और डिमनेशिया होने की आशंका 2.9 गुना अधिक थी।
अब बात करते हैं सामान्य कोल्ड ड्रिंक्स की। कुछ समय पूर्व इम्पीरियल काॅलेज, लंदन ने इन पर अध्ययन किया। अध्ययन के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को वजन कम करना है तो उसे सबसे पहले चीनी से भरपूर साॅफ्ट ड्रिंक्स छोड़ने होंगे। इनकी चीनी शरीर में अनावश्यक कैलरो में बढ़ोतरी तो करती ही हैं, साथ ही मस्तिष्क के रिवार्ड संेटर्स को सक्रिय करती है जिससे अधिक चीनी खाने की तलब (शुगर क्रेविंग) होती है।

आजकल एनर्जी ड्रिंक्स का भी काफी प्रचार-प्रसार हो रहा है। इनमें अन्य साॅफ्ट ड्रिंक्स के मुकाबले अधिक चीनी ही नहीं, ज्यादा कैफीन भी होता है। कैफीन का ज्यादा प्रयोग दिल और लीवर की बीमारी ही नहीं, सीज़र और मौत तक दे सकता है। किशोरों में इसके अधिक प्रयोग से विकास संबंधी समस्याएं, अपर्याप्त नींद और आक्रामक व्यवहार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
साॅफ्ट ड्रिंक्स सिर्फ मोटापा ही नहीं बढ़ाते, दांत भी खराब करते हैं। इनमें सिट्रिक, कारबोनिक और फाॅस्फोरिक एसिड होते हैं जो दांतों के इनेमल या बाहरी परत को बर्बाद कर देते हैं। इन पेय पदार्थों के सेवन के बाद दांतों में जो चीनी बची रह जाती हैं उसमें बैक्टीरिया पनपते हैं जो दांतों में कैविटी पैदा करते है।
कुछ समय पूर्व स्वास्थ्य से जुड़ी संस्थाओं ने साॅफ्ट ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों से आग्रह किया था कि वो अपने उत्पादों का महिमा मंडन और अंधाधुंध प्रचार बंद करें क्योंकि बच्चों में मोटापे के लिए उनके उत्पाद काफी हद तक जिम्मेदार हैं। इन संस्थाओं में जाॅर्ज इंस्टीट्यूट आॅफ ग्लोबल हेल्थ, संेटर फाॅर साइंस एंड एनवायरनमेंट, वल्र्ड ओबेसिटी फेडेरेशन और वल्र्ड पब्लिक हेल्थ न्यूट्रीशन ऐसोसिएशन जैसी संस्थाएं शामिल थीं।
इन संस्थाओं ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के हवाले से बताया कि भारत में वर्ष 2000 से 2013 के बीच डाइबिटीज के मरीजों से संख्या दोगुनी हो गई। 1998 में जहां ये 2.3 करोड़ थे वहीं 2013 में बढ़ कर 6.3 करोड़ हो गए। यही नहीं, इस अवधि के दौरान भारत में चीनी वाले पेय पदार्थों का उपभोग पांच गुना बढ़ चुका है। भारत में हर वर्ष लगभग दो लाख लोग चीनी से जुड़ी बीमारियों से जान गंवाते हैं।
इन संस्थाओं ने साॅफ्ट ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों से अनुरोध किया है कि वो अपनी बोतलों और अन्य कंटेनर का आकार घटाएं, पेय पदार्थों में चीनी की मात्रा कम करें और कंटेनर पर साॅफ्ट ड्रिंक्स के दुष्परिणामों के बारे में चेतावनी लिखें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तो फैट टैक्स लगाने की सिफारिश की है और इंग्लैंड सहित यूरोप के कुछ देशों में इसे मान भी लिया गया है। भारत में भी इसकी तैयारी चल रही है।
चीनी के सेवन के संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनके मुताबिक किसी व्यक्ति को प्रतिदिन 25 ग्राम (6 टेबल स्पून) से अधिक चीनी नहीं लेनी चाहिए। जबकि एक सामान्य साॅफ्ट ड्रिंक में 40 ग्राम (10 टेबल स्पून) चीनी होती है।
अब सवाल ये है कि अगर साॅफ्ट ड्र्रिंक्स सेहत के लिए खराब हैं तो इनकी जगह क्या प्रयोग किया जाए? इसका सरल उत्तर है – पानी। जब आपको प्यास लगे तो पानी पिएं। अगर एनर्जी लेवल कम लगे तो आप फल, मेवे, खजूर आदि खा सकते हैं। फालतू चीनी खा कर उसे पचाने के लिए मेहनत करने से बेहतर है, उसका सेवन न करना।
अब आप जब भी गर्मी में बाहर निकलें तो साथ में साफ पानी, कुछ मेवे, फल आदि ले जाना न भूलें। ये सोडा वाले पेय पदार्थों से सस्ते पड़ेंगे और सेहतमंद भी।

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